रूप पाहता लोचनी...
Saturday, January 7, 2012
विठाई किठाई माझे कृष्णाई कान्हाई
रंगा येई वो येई, रंगा येई वो येई |
विठाई किठाई माझे कृष्णाई कान्हाई ||
वैकुठवासिनी विठाई जगत्र जननी |
तुझा वेधू माझे मनी ||
कटी कर विराजित मुगूट रत्नजडीत |
पितांबरू कासिला तैसा येई का धावत ||
विश्वरूप विश्वं-भरे कमळ-नयने कमळा-करे वो |
तुझे ध्यान लागो बाप रखुमादेवीवरे वो ||
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